मदुरै (तमिलनाडु) में मिले 2000 साल पुराने शहर के अवशेष

तमिल भाषा में लिखे गये ग्रंथों में मदुरै के पास एक शहर के होने के प्रमाण हैं, लेकिन कोई पुरातत्विक साक्ष्य नही होने के कारण कुछ इतिहासकारों ने इसे महज एक कोरी कल्पना करार दिया था | संगम युग, जो की 400 BCE से २०० AD तक चला, दक्षिण भारत के इतिहास में एक ऐसा युग था जब तमिलनाडु के मदुरै शहर में उस काल के सभी महान कवी और ज्ञानियों ने वहां के पंड्या राजाओं के संरक्षण में एक शैक्षिक संघ का निर्माण कर बहुत से महान तमिल काव्य ग्रंथों की रचना कियें| उन ग्रंथों में उस काल का सामाजिक और संस्कृतक जीवन का विवरण मिलता है , ये वही ग्रन्थ हैं जिनमे मदुरै के निकट एक विशाल और भव्य शहर होने के बारे लिखा गया है |

अब तक कोई ठोस साबुत नही होने के कारण इस तरह के प्राचीन तमिलनाडु में एक शहर के होने को हमेशा से झुठलाया जाता रहा, लेकिन आख़िरकार मदुरै से 15 किलोमीटर दूर शिवगंगा जिले के कीलाडी गांव में बैंगलोर के भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग ने एक बेहतरीन खोज किया | पुरात्वविदों और शोधकर्ताओं के एक संघ ने मिलकर धवश्थ हो चुके एक बहुत पुराने शहर को खोज निकाला है जो संभवतः अपने समय में मोहन जोदड़ों के जैसे विशाल और महत्वपूर्ण स्थान रहा होगा|

अब तक हुए खुदाई में लगभग 3000 प्राचीन कालीन वस्तुयें प्राप्त हुईं हैं जैसे की पत्थर के पासे, चैस के टुकड़े जिनका आकर विल्कुल आधुनिक काल के चैस के जैसे हैं, कुछ आभूषण, धातु और हड्डियों के बने हथियार आदि| इन प्राप्त वस्तुओं से ये अनुमान लगाया जा सकता है की वे न सिर्फ व्यापार करते थे बल्कि वे अपने आमोद प्रमोद के लिए विभिन्न प्रकार के खेल भी खेलते होंगें |

खुदाई में बहुत से मिटटी के बर्तनों के टुकड़े भी प्राप्त हुए हैं जिनपे तरह तरह की सजावट की गयी है| उन टुकड़ों पर लिखे गये नाम वही तमिल नाम हैं जो संगम साहित्य में मिलते हैं , इसके आलावा इनपे लिखे लेख तमिल भ्रमहीं लिपि में लिखे गयें हैं, जिनसे वर्तमान तमिल लिपि का उद्भव माना जाता हैं |

इस खोज में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की ढेर साडी इमारते जो की पूजा स्थल या सामूहिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए बनाये गयें हैं वे पक्की ईटों से बने हैं, इससे पहले इस तरह के पक्की ईटों के अवशेष बहुत ही कम जगहों पर ही मिले हैं |

यक़ीनन यह नयी खोज न सिर्फ तमिलनाडु के इतिहास को बल्कि भारत के इतिहास को भी एक नयी दिशा प्रदान करेगी और शायद एक नयी सभ्यता और समाज के बारे में हमें नए तथ्यों से अवगत कराये|

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