ब्रम्हांड के पांचवे बल की परिकल्पना और गुरुत्वाकर्षण की अबूझ पहेली

जब से गुरुत्वाकर्षण की खोज हुआ है, तभी से यह पूर्ण रुप से समझा नहीं जा सका है| १७वी शताब्दी में जब सर न्यूटन ने गुरुत्वीय बल की खोज की तो उन्होंने ने गुरुत्वाकर्षण को एक बल के रूप में प्रश्तुत किया, उनके अनुशार दो पिंडों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणन के अनुक्रमानुपाती और उनके बीच के दूरियों के व्युत्क्रमानुपाती होता है |

लेकिन फिर २०वी सदी में अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक ने गुरुत्वीय क्षेत्र का एक नया अवधारणा अपने सापेक्षता सिद्धांत के साथ प्रस्तुत किया, जिसने सम्पूर्ण विज्ञान के अब तक हुए खोजों को तुक्ष्य साबित कर दिया | सापेक्षता के सिद्धांत ने मानव को ब्रम्हांड की उत्पत्ति और रचना को जानने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया| लेकिन फिर भी गुरुत्वाकर्षण को सापेक्षता का सिद्धांत पूर्ण रूप से समझा नहीं सका| स्वयं आइंस्टीन अपने जीवन के अंतिम घडी तक गुरुत्वाकर्षण को समझने की कोशिश करते रहें | अल्बर्ट आइंस्टीन अक्सर यह बात कहा करते थे की वर्तमान में उपलब्ध सभी वैज्ञानिक खोजे इतना पूर्ण नहीं हैं की वे गुरुत्वाकर्षण को पूर्ण रूप से समझा सकें|

गुरुत्वाकर्षण को समझने में सबसे बड़ी दुविधा यह है की इसका प्रभाव एक बड़े क्षेत्र में होता है | लेकिन इसका प्रभाव इतना जयादा नहीं होता जैसे की स्ट्रांग या वीक फाॅर्स का होता है | इस तरह की सीमाएं ही इसको पूर्ण रुप से समझने में सबसे बड़ी बाधा हैं |

जो प्रश्न खगोलविदों और विज्ञानियों को सबसे ज्यादा परेशान करता है वह यह है की ब्रम्हांड में गुरुत्वाकर्षण बल इतना ज्यादा है की इतना बल ब्रम्हांड में उपस्थित पदार्थ की संपूर्ण मात्रा का लगभग दो गुना मात्रा ही उत्पन्न कर सकता है| वैज्ञानिकों के लिए यह एक अबूझ पहेली ही है की इतना ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल आखिर कहाँ से आता है, कुछ विज्ञानियों ने यह सुझाया की शायद ब्रम्हांड में कुछ छिपे हुए पदार्थ मौजूद हों,जिसे हम देख नहीं सकते हैं और जिनके कारन ही इतनी ज्यादा मात्रा में सृष्टि में गुरुत्वाकर्षण बल मौजूद हो | लेकिन बहुत समय से विभिन्न प्रकार से किये गए अनुशन्धानों और अन्वेषणों के बढ़ भी उस छिपे हुए पदार्थ जिसे वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर नाम दिया है को अभी तक खोजा नही जा सका है |

इन अबूझ पहेलियों को सुलझाने के लिए ही कुछ वैज्ञानिकों ने एक नए और अब तक नही खोजे गए पांचवें बल का अवधारणा पेश किया है, उनके अनुशार हमारे ब्रम्हांड सिर्फ चार नही अपितु पांच बल मौजूद हैं और इस बल को खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने अपने आकाश गंगा ‘मिल्की वे’ के आस पास के तारों के पथ का विश्लेषण करने का सुझाव दिया है | उनके अनुशार आकाश गंगाओं के केंद्र के पास गुरुत्वीय बल सबसे ज्यादा होता है, इसलिए अगर कोई और बल उन तारों के पथ को प्रभावित करेगा तो उसे आसानी से पता लगाया जा सकता है | इस संपूर्ण डाटा संग्रह और विश्लेषण में लगभग २० साल लगेंगे, तब तक कौन जनता है? हो सकता है कोई और नयी शोध हमें कुछ नया नजरिया दे जाये |

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