भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का जीवन परिचय

भारत के इग्यारहवें राष्ट्रपति अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम का जन्म 1931 में रामेश्वरम, तमिनाडु के एक गरीब परिवार में हुआ था | अब्दुल कलाम भारत के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थें, भारत के मिसाइल और नाभिकीय शस्त्रों के निर्माण में इनका योगदान सराहनीय है | यही कारण है की इन्हे भारत के ‘मिसाइल मैन’ के नाम से भी जाना जाता है | राष्ट्रपति कलाम ने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की तद्पश्चात वे DRDO ( डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन ) के एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट में एक वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हुए |

अब्दुल कलाम ने DRDO में परियोजना निदेशक के तौर पर कार्यरत रहते हुए, भारत के प्रथम स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV -III) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी | इसी प्रक्षेपण यान का उपयोग कर के भारत ने ‘रोहिणी’ नाम के अपने उपग्रह को 1980 में पृथ्वी के बाहरी कक्षा में  स्थापित कर स्वयं को विश्व के अंतरिक्ष क्लब का हिस्सा बनाया | रक्षा मंत्रालय के कार्यकारी अधिकारी का पदभार सम्हालते हुए DRDO द्वारा स्वदेशी ‘नियंत्रित मिसाइल प्रोग्राम’ के निर्माण में भी अहम् भूमिका निभायी | राष्ट्रपति बनने से कुछ समय पूर्व, कलाम ने अल्प समय के लिए तमिलनाडु के अन्ना विश्वविद्यालय में अन्तरिक्ष विज्ञान के प्राध्यापक रहकर अपना ज्ञान प्रकाश नव जिज्ञाषुओं पर प्रवाहित किया | 1992 -1999 तक वे रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक सलाहकार तथा DRDO में भारत सरकार के सचिव के रूप में कार्यरत रहें | उनके ही देख-रेख में भारत ने 1998 में अपने नाभिकीय शस्त्र का परिक्षण किया |

भारत के इस महान वैज्ञानिक, विचारक और राष्ट्रपति ने 27 जुलाई 2015 को इस दुनिया को सदा के लिए छोड़ कर चले गयें पर कहीं न कहीं उनका योगदान, उनकी सोच और उनके जीवन जीने का तरीका सभी भारतीयों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा |

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